Friday, April 20, 2012

नागपुर में स्थित विश्वधरोहर स्मारक विदर्भ की शान

नागपुर में स्थित विश्वधरोहर स्मारक विदर्भ की शान
महाराष्ट्र की उप राजधानी नागपुर में स्थित दीक्षा भूमि , ड्रेगन पेलेस, हेडगेवार स्मारक आदि विश्वधरोहर स्मारक विदर्भ की शान हैं . यहाँ देश विदेश से आने वाले सैलानी तथा आम इन्सान डा बाबासाहब अंबेडकर जी के महान कार्यसे पावन हुए दीक्षा भूमि का विशाल प्रांगन देख, जपान की स्वयंसेवी संस्था के सहायतासे ४० एकड़ में स्थित ड्रेगन पेलेस तथा दुनियासे आनेवाले हिन्दुओके प्रतिनिधियों के एकमेव प्रशिक्षण स्थल गोडवलकर स्मारक को भेट देकर खुद को गौरवान्वित महसूस करते है. इन स्मारकों ने विदर्भ को चार चाँद लगा दिए है इस में कोई दो राय नहीं .
नागपुर में दीक्षा भुमिपर डा बाबासाहब अंबेडकर जी का स्मारक बनाया गया है. यों तो इस स्थान का विशेष महत्व है १४ अक्तूबर १९५६ को डा अंबेडकर ने हिन्दू धर्म त्याग कर बोद्ध धर्म का स्वीकार किया था तथा उन्होंने लाखो लोगो को इसी दिन बोद्ध धर्म की दीक्षा दी थी . १४ एकड़ में फैली इस भूमिपर हर साल अशोक विजयादशमी के दिन तथागत भगवान बोद्ध तथा डा बाबासाहब अंबेडकर को अभिवादन करने देश विदेश से लाखो लोग इकठा होते है. डा बाबासाहब अंबेडकर के निर्वान के पश्चात वर्तमान में केरल के राज्यपाल तथा वरिष्ठ राजानेतिक नेता रा सु गवई की अध्यक्षता में बने डा बाबासाहब अंबेडकर स्मारक समिती के सतत प्रयास से यहाँ विशाल स्मारक का निर्माण हुआ. जो की राष्ट्रीय स्मारक के रूप में नामित हुआ. इस स्मारक निर्माण के लिए महाराष्ट्र सरकार ने भारी आर्थिक मदद की है. स्मारक की संरचना की और नजर डाले तो २०० बटा २०० फिट यह स्मारक नजर आता है. इस स्मारक के प्रथम तल पर बने विशेष हाल में ५ हजार लोग एक ही समय ध्यान (मेडीटेशन) कर सकते है. इस हाल की संरचना वास्तु शास्त्र का एक अद्भुत नमूना है , हाल के छत के रूप में बने १२० बटा १२० फिट के विशाल गुम्बत को एक भी पिल्लर नहीं है यह इसकी खास विशेषता कही जा सकती है. बोद्ध भिक्कूओ के निवास हेतु यहाँ ' भिक्कू निवास ' बनाया गया है, श्रीलंका के अनन्त्पुरम से लाये गए छोटे से बोधी वृक्ष का रूपांतरण विशाल बोधी वृक्ष में हुआ है. जो की ,आगंतुको का ध्यान अपने और आकर्षित करता है. पाली भाषा के प्रचार हेतु यहाँ 'पाली भवन ' का निर्माण किया गया है. इसी परिसर में डा बाबासाहब अंबेडकर स्मारक की और से कला -वाणिज्य तथा विधि कालेज का कार्यपालन होता है जिस मे लगभग ५ हजार से भी ज्यादा छात्र- छात्रएं शिक्षा अर्जन करते है.
नागपुर के कामठी इलाके में ४० एकड़ क्षेत्र में बना विशाल ड्रेगन पेलेस भी नागपुर तथा विदर्भ की शान है. जपान के टोकियो शहर से आए ८५० कारीगारो ने इस वास्तु का निर्माण किया जो की, वास्तुशास्त्र का अद्भुत नमूना है. ड्रेगन पेलेस के निर्माण कार्य को २८ महीनो का समय लगा. इस वास्तु ५ करोड़ रुपयों के लागत से बनकर तैयार हुई तथा इस के लिए जपान से सहायता मिली है. हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहाँ जपान से धर्मगुरु आते है. हर रोज यहाँ बोद्ध प्रार्थना होती है विभिन्न धर्मो के लोग इस में सम्मिलित होते है. हर साल दीक्षा भूमि को भेट देने वाले सभी बोद्ध श्रद्धालु ड्रेगन पेलेस को भी भेट देते है ऐसी जानकारी ड्रेगन पेलेस स्मारक समिति की प्रमुख तथा महाराष्ट्र सरकार में मंत्री रही सुरेखा कुंभारे ने दी. वास्तु शास्त्र का एक अच्छा नमूना होने के कारन ड्रेगन पेलेस का नाम आन्तरराष्ट्रिय वास्तु सूचि में दर्ज होणे की बात भी कुंभारे ने कही .
विश्व मे हिन्दुओ के सबसे बड़े संघटन के तौर से मशहूर "राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ "(आरएसएस) का मुख्यालय इसी नागपुर शहर में स्तिथ है. तथा संघ के मुख्य निर्माता केशव बळीराम हेडगेवार जी का यहा रेशीमबाग स्थित विशाल स्मारक अपनी और ध्यान आकर्षित करता है . हेडगेवार स्मारक में जहा हेडगेवार जी का शिल्प बनाया गया ही ठीक उसके नीचे हेडगेवार जी की समाधी यहाँ देखने को मिलती है. उनके समाधी के ठीक सामने संघ के दुसरे सरसंघ चालक गोडवलकर गुरूजी की समाधी भी यहाँ स्थित है. इसी परिसर में सरस्वती विद्या मंदिर तथा विश्व से आनेवाले स्वयं सेवको के निवास हेतु बड़ी ईमारत बनायी गई है . संघ के तृतीय वर्ष की शिक्षा केवल इसी स्मारक में दी जाती है व इस प्रशिक्षण हेतू देश -विदेश के स्वयंसेवक बड़ी तादाद में यहाँ १ महीने के प्रशिक्षण शिबिर में हिस्सा लेने पहुचते है. संघ के सह्कर्यवाहक का चुनाव भी इसी स्मारक में सम्पन्न होता है .
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