Saturday, October 5, 2019

सेवानिवृत्ती दिन की स्मरणीय यादें


(संपादन एवं रचना : रितेश मोतीरामजी भुयार

इन्सान का  जीवन मानों दिवार पर लगी ‘घडी’ की तरह है, जो हमें संदेश देती ‘जीवन चलने का नाम चलते रहो सुबहो शाम…..’ लेकीन, इस सतत चलने वाले जिंदगी में ऐसा मौका आता है जहां एक दिन रुकना पडता है. वैसा ही  रुकने का दिन सरकारी नोकरी में भी आता है. ढाई दशक के निरंतर सरकारी सेवा के बाद मेरे जीवन में भी  सेवानिवृत्ती का दिन आ ही गया. जीस कार्यालय में मेरा रोजाना आना जाना लगा रहता अब वह रूक ने वाला था. मानों सरकारी नोकरी का पूर्ण विराम लगने वाला ओर सेवानिवृत्ती  वाली जींदगी जिने के लिए अल्प विराम ही कह लिजीए एक तरह से. पर में खुशनसीब हु जिसके सेवानिवृत्ती का दिन स्मरणीम बन गया.    

            महाराष्ट्र सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग का दिल्लीस्थित ‘महाराष्ट्र सूचना केंद्र’ जो विगत २७ सालों से मेरे रोजी रोटी का जरिया था आज इसी कार्यालय  से बिदाई अर्थात सरकारी नोकरी से सेवानिवृत्त होने का दिन. कार्यालय के लायब्ररी में ३१ अगस्त २०१९ को आयोजित समारोह में मेरे सेवानिवृत्त साथी तथा सेवा में कार्यरत सभी अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे. कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारी निजी कारनों से उपस्थित नही हो सके लेकिन , उन्होंने मुझे अपने शुभकामना संदेश भेजे . यह तो मानों मेरी यादों की गठरी है जो मै इस कार्यालय से बांध कर अपने घर ले जा रहा था.
इस  भावविभोर मौके पर सभी ने अपने खट्टे मिठे अनुभवों के आधार पर मेरे बारे में अपने विचार रखे. मेरे कुछ साथी भावूक हो गये और अपने आंसुओं को रोख नही पाए. मेरे सेवानिवृत्त होने का दुख उनकी आखों और चहरे से झलक रहा था. उस समय कार्यक्रम का वातवरण गमगीन हो गया था. यह सभ देखकर मेरी आँखों से आंसु झलक रहे थें. लेकिन कार्यालय प्रमुख के साथ मुख्य अतिथीके भाती सभ के बिच बैठा में इस वक्त खुद को भावूक होने से संभाल रहा था.
कार्यालय के उपसंपादक  श्री रितेश जी को तहे दिल से धन्यवाद करता हू.  श्री रितेश भुयार जी ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए. हमेशा ही कार्यालय के कार्यक्रम का निवेदन करने की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने आज के इस कार्यक्रम की भी कमान संभाली थी. मेरे परिवार के लोगों की उपस्थिती देखते हुए उन्होंने इस  कार्यक्रम  की पुरी कारवाई हिंदी भाषा में की. उन्होंने  अपने अनुभव के आधार पर मेरें व्यक्तीत्व के विभिन्न्‍ा पैलुओं के बारे में उपस्थित सभी को अवगत कराया. उस को सुन कर कुछ अधिकारी -कर्मचारी तो हैरान हो गये यहां तक की कार्यालय प्रमुख उपनिदेशक श्री दयानंद कांबले जी ने अपने वक्तव्य में कहा की, ‘ मैं, हैरान हु की मुझे रामदास जी के व्यक्तीत्व के बारे में आजतक कुछ पता नही चला. ओर यह  सब कुछ उनके सेवानिवृत्ती के दिन पता चला’.
            श्री. कांबले जी ने जो बाते व अनुभव सभ के सामने  रखे इसके लिए मै   उनकी भावनाओं  का  विनम्रता  से  स्वीकार करता हॅूं और उन्हे हृदय से धन्यवाद देता हॅूं.
            हमारे एक साथी श्री नैनसिंह तो शेरो शायरी के माहिर है. रामलिला में उन्होंने निभाए कई किरदारों के कारन उनके शब्दों में अलग ही मिठास है. उन्होंने अपने शब्दों को एक लडी में पिरोकर शायरी के अंदाज में मेरे व्यक्तीत्व को सभी के सामने रखा. मनोरंजक बातों के साथ ही उन्होंने मेरे संगिनी के अकाली निधन के संदर्भ में की शायरी वातावरण को भावूक कर गयी और आज के इस अवसर पर  मुझे मेरे  प्रिय पत्नी  की कमी  का अहसास दिला गयी. इस कार्यालय में जो भी कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए उनकी  पत्नी  इस  मौके पर उनके साथ उपस्थित रही लेकीन, मैने इस बारे में खुद को दुखी  महसुस किया.
             कुछ साथीओंने मेरे काम की तारिफ की, हमारे लेखा विभाग के कर्मचारीने ‘मेरे अनुषाशीत एवं गुणवत्तापूर्ण काम करने का बखान किया’. तो लघुलेखक ने  ‘काम के प्रती मेरी निष्ठा  पर प्रकाश  डालडते हुए कहा,  दुसरा कर्मचारी उनके जगह पर आने से पहले वह अपना कार्यलय के स्वागत कक्ष का आसन नही छोडते थे तथा कार्यालय में आनेवाले विभीन्न क्षेत्र के आगंतुको का प्यार से स्वागत करते और उन्हों आवश्यक जानकारी मुहय्या करते थे’. कार्यालय के अन्य साथियों के प्रती  नम्र व्यवहार तथा सदैव हसमुख व सभी को मदद करने का स्वभाव यह बाते भी कहीओने इस अवसर पर रखी , जो मुझे गदगद कर गयी. मैंने अपनी नोकरी के प्रती निष्ठा से किया काम ओर  साथही में पारिवारीक जिम्मेदारी का किया वहन इन बातों पर प्रकाश डाला गया.
            परिवार के सदस्यों की ओर से मेरी बेटी ने इस कार्यक्रम में अपने विचार रखे. मेरे सहित उपस्थित सभी की नजर ओर कान उसकी बातों पर टिके रहे. उसके एक एक शब्द से  मेरे प्रति प्यार झलक रहा था.  मुझे नाज है अपने बेटीपर जिस ने इस कार्यक्रम में अपने विचार रखते हुए ‘पापा कों बेस्ट पापा ऑफ द वर्ल्ड’ के खिताब से नवाजा. तब मुझे अपनेद्वारा बेटी को दिए अच्छे संस्कारों का अहसास हुआं ओर एक जिम्मेदार बाप होने के कर्तव्य में मै सफल  हुआ यह अनुभूती भी मैने इस कार्यक्रम में लि.
            महाराष्ट्र शासन के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के कुछ कार्यालय के अधिकारीयों ने मुझे सोशल मिडीयापर  शुभकामनाए दी उन सभी शुभचिंतकों का मै  हृदय से  धन्यवाद करता हॅुं. और  आशा करता हॅुं की  नोकरी के माध्यम से आप सभी से जुडा यह स्नेह ऐसेही बना रहेगा.
            सेवानिवृत्ती के दिन का अनुभव बयां करते समय मैने ‘घडी’ का उदाहरण दिया था. वैसे ही,  ‘जिंदगी के सफर में गुजर जाते है जो मकाम ओ  फिर नही आते’  इस वास्तव को भी मै नही भुलना चाहता हू. बिते २७ साल कि नोकरी में मैने जो अच्छी बाते सिखीं ज्ञान प्राप्त किया उसका समाज ओर परिवार के लिए उचित तरह से उपयोग करूगा ओर इस देश का सच्चा नागरीक होने का दायीत्व निभाने का मै पुरा प्रयास करूंगा यह प्रण मै इस अवसर पर लेता हू. ओर मेरे सेवानिवृत्ती  का यह  स्मरणीय दिन हमेशा के लिए अपने शब्दों से ही सही अपनी गठरी में संजो के रखता हूं.  
आपका
रामदास भारती,
संवानिवृत्त कर्मचारी ,महाराष्ट्र सूचना केंद्र नई दिल्ली.
०००००

            

No comments:

Post a Comment