Saturday, September 19, 2015

दिल्ली स्थित गणेशोत्सव



दिल्ली स्थित गणेशोत्सव

गणेश चतुर्थी महाराष्ट्र का एक प्रमुख त्यहार है. यह त्यहार गणेशोत्सव के नाम से भी जाना जाता है. महाराष्ट्र राज्य में बडी़ धूमधाम से मनाया जाने वाला यह त्यौहार महाराष्ट्र के बाहर कर्नाटक, तमिलनाडू, आंध्रप्रदेश, दिल्ली इत्यादि राज्यों में भी हर्षोल्लास से मनाया जाता है. छत्रपती शिवाजी महाराज के काल से धार्मिक उत्साह से यह त्यौहार मनाया जाता है. अंग्रेजों के बेंडियों में बुरी तरह फंसे देशवासियों को इकठठा कर उनमें देशप्रेम का अलक जगाने, प्रबोधन करने के माध्यम से इस त्यौहार को सामाजिक एकता का प्रतिक बनाने का श्रेय महान देशभक्त लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को जाता है. तिलक ने महाराष्ट्र में गणेशोत्सव को सार्वजनिक तौर पर मनाने की शुरुआत की.  इस त्यौहार को राष्ट्रीय त्यौहार बनाने का श्रेय भी तिलक को ही जाता है. आज इस त्यौहार की लोकप्रियता चरमोत्कर्ष पर पहुंच गई है. इस में राजधानी दिल्ली भी पीछे नहीं है. यहां स्थित विविध महाराष्ट्र मंडल तथा अन्य दिल्लीवासी इस त्यौहार को बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास से मनाते है. आइये डालते है दिल्ली में मनाये जाने वाले गणेशोत्सव पर एक नजर .
       
दिल्ली में सार्वजनिक गणेशोत्सव मनाने की परंपरा लगभग ७५ से ८० वर्षों से चली आ रही है. पुरानी दिल्ली से शुरु हुई यह परंपरा पूरी दिल्ली तथा इसके परिसर में बसे गुडगांव, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद तक पहुंच गई है. पुरानी दिल्ली के स्नेह संवर्धक समाज मंडल की ओर से दिल्ली में सर्वप्रथम गणेशोत्सव मनाने की शुरुआत हुई. आज नई दिल्लीस्थित सार्वजनिक उत्सव समिती, पीतमपुरा, सार्वजनिक उत्सव समिती, महाराष्ट्र सदन, गणेश सेवा मंडल, लक्ष्मी नगर, दत्त विनयाक मंदिर तथा महाराष्ट्र मित्र मंडल जनक पुरी, महाराष्ट्र मंडल-विठ्ठल मंदिर, आर.के.पुरम, मराठी मित्र मंडल अलकनंदा, सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल पहाड़गंज, महाराष्ट्र मंडल- गीता मंदिर-फरीदाबाद, गणराज महाराष्ट्र मित्र मंडल- ग्रेटर नोएडा, महाराष्ट्रीयन समाज समिती-नोएडा इत्यादि राष्ट्रीय राजधानि क्षेत्र (एन.सी.आर) के शहरों में स्थित गणेश मंडल में गणेशोत्सव को श्रध्दापूर्वक मनाया जाता है. दस दिनों तक चलने वाले इस गणेशोत्सव में रोजाना गणपती की आरती तथा गायन, नृत्य, नाटक इत्यादी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है, जिस में सभी धर्मों के लोग सम्मिलित होकर इस त्यौहार का आनंद लेते है.
दिल्लीवासी गणेश भक्तोंको गणेशोत्सव में लगनेवाली गणेशजी की मूर्ति उपलब्ध कराने का कार्य दिल्ली के कनॉट प्लेस में बाबा खड़क सिंह मार्ग पर स्थित महाराष्ट्र लघु औद्योगिक विकास महानिगम द्वारा संचालित मर्‍हाटी महाराष्ट्र एम्पोरियम विगत ४४ वर्षों से कर रहा है. इस वर्ष भी महाराष्ट्र एम्पोरियम में गणेशमूर्ति का विक्री प्रदर्शन लगा था. तथा  यहां बड़ी संख्या में आये गणेशभक्तों में पूरे हर्षोल्लास के साथ अपने लाडले गणेशजी की प्रतिमा खरीदने व वस्त्र अलंकार और पूजा सामग्री इत्यादि खरीदने की होड़ लगी हुई है. ज्यादातर गणेश भक्त गणेशजी की मूर्ती खरीदने का ऑर्डर गणेशमूर्ति स्थापना के दो – तिन महीने पहले ही देना शुरु कर देते है. 
सुंदर और मनमोहक गणेश मूर्तियों के विक्री प्रदर्शन हेतू विगत २३ वर्षों से महाराष्ट्र के थाने जिले के गणेश शिल्प कला केंद्र के मालिक मंदार शिंदे ने इस प्रदर्शन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष २ इंच से लेकर ६ फीट की ऊंचाई वाली गणपति की मूर्ती प्रदर्शन में लगाई गई थी. प्रदर्शन में रखी गई इन मूर्तियों की कींमत ३5० रुपये से लेकर ३० हजार रुपये तक रखी थी. इस वर्ष लगभग १,००० मूर्तियां प्रदर्शन में विक्री के लिए रखी थी. जिसमे से ६० फिसदी मूर्तियां मिट्टी की तथा ४० फीसदी प्लास्टर ऑफ पॅरिस (पीओपी) की बनी थी. जयपूर, लखनऊ, पानीपत, सोनीपत इत्यादि शहरों से गणेश भक्त मूर्ती खरीदने के लिए यहा आते हैं. भारत के सभी धर्म, पंथ, समुदाय एंवम् भाषिक प्रदेशों के लोग मूर्ती खरीदने में रुची रखते है. भारत के विभिन्न प्रांतो के साथ ही अन्य देशोंमे मूर्तीयाँ भेजी जाती है. कई विदेशी भी एम्पोरियम में  आकर गणेशजी और उत्सव के बारे में जानकारी लेते है.
दिल्लीस्थित महाराष्ट्रीयन लोगों के साथही अन्य धर्मों के लोग भी आज गणेशोत्सव बड़े ही जोश और उत्साह से मनाते हैं. तथा महाराष्ट्र मंडलों में मनाये जाने वाले विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सहभाग लेते हैं. गणेशोत्सव के माध्यम से एक सांस्कृतिक व सामाजिक एकता का संदेश मिलता है.
दिल्ली तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में रहने वाले मराठी लोंग गणेशोत्सव मनाते है. प्रमुख रुप से निवासी आयुक्त कार्यालय जो कि दिल्ली के कोपरनिक्स मार्ग पर स्थित है ओर महाराष्ट्र सदन के नाम से परिचित है, यहां विगत २३ वर्षों से सार्वजनिक गणेशोत्सव समिती की और से गणेशोत्सव मनाया जाता है. इस मंडल की ओर से विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है.  
महाराष्ट्र सदन में दस दिन तक चलने वाले उत्सव में भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा, प्रतिभा देवीसिंग पाटील, भूतपूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण अडवाणी के साथही विविध केंद्रिय मंत्री, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, राज्यपाल, व मंत्रिमंडल के मंत्री, विधायक तथा सांसद गणेशोत्सव में सम्मिलित हुए है.
गणेश चतुर्थी के दिन ढोल नगाड़े, ताशे, लेझिम व अन्य गाजे-बाजें के साथ गणेशजी की स्थापना की जाती है. दस दिन तक हर्षोल्लास के वातावरण में चलनेवाले इस गणेशोत्सव का समापन समारोह अनंत चतुरदशी को होता है. दिल्ली के विविध मराठी मंडल यहा के चांदणीचौकस्थित टाऊन हॉल के पास एकत्रित होते है. महाराष्ट्र के लोकनृत्य, झांज पथक,ढोल नगाड़े, ताशे, लेझिम व अन्य गाजे-बाजों के साथ बडी संख्या में गणेशभक्त, इस आशा के साथ की गणेशजी अगले बरस जल्दी आएंगे, अपने प्यारे भगवान को दु:खी मनसे यमुना नदी में विसर्जन कर विदाई देते है.
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